जलवायु प्रूफिंग: मत्स्य पालन

हाल ही में वर्षा प्रवृत्ति में परिवर्तन, जैसे पूर्व तथा पश्च मानसून जलवृष्टि तथा मानसून आगमन में परिवर्तन की वजह से किसान प्रभावित हुए हैं। इसके साथ तापमान वृद्धि एक और चनौती बड़ी चुनौती है।

इन किसानों के जीविकोपार्जन के विकल्पों में वृद्धि हेतु मध्य प्रदेश सरकार ने मनरेगा के तहत “मीनाक्षी परियोजना” का प्रारंभ किया है। मनरेगा का लक्ष्य कम से कम सौ दिनों का रोजगार सुनिश्चित करके ग्रामीण क्षेत्रों में जीविकोपार्जन सुरक्षा को बढ़ावा देना है। मीनाक्षी योजना का लक्ष्य भूमि के एक हिस्से में छोटे तालाबों या मत्स्य पालन केंद्रों का निर्माण कर किसानों को वैकल्पिक आय स्रोत उपलब्ध कराना है।

इन गतिविधियों की स्थिरता को जलवृष्टि तथा तापमान परिवर्तन से खतरा है, क्योंकि उच्च सघन वर्षा की घटनाओं में इजाफे के कारण हो रहे अपवाह से तालाबों में गाद भरने की दर बढ़ रही है। इसके अतिरिक्त तापमान में तब्दीलियों की वजह से मछलियों के प्रजनन काल में परिवर्तन, विकास में गिरावट तथा घटते हुए समग्र उत्पाद मछली उद्योग को नकारात्मक असर डाल सकते हैं।

यह परियोजना निर्धारित करती है कि देखें कि  मीनाक्षी योजना के तहत निर्मित तालाब तकनीकी तौर पर समक्ष हैं या नहीं, और जलवायु की वजह से हो रहे अतिरिक्त चुनौतियों से निपटने वास्ते संस्थागत इंतजाम काफी हैं कि नहीं हैं। इस प्रकार की आंकलन पद्धति जलवायु प्रूफिंग कही जाती है। इस पद्दति से प्राप्त अनुशंसाएं मीनाक्षी दिशा निर्देशों को जलवायु प्रूफ बनाने के समग्र मकसद के साथ राज्य स्तर पर एक नीतिगत बातचीत के लिए प्रेरित करती है।

जलवायु प्रूफिंग: मत्स्य पालन  की पूरी रिपोर्ट अंग्रेजी में पढ़ने के लिए पीडीएफ यहां से डाउनलोड करें:

संसाधन प्रकार:शोध अध्ययन
प्रकाशित तिथि:जून 6, 2014
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