पीएचडी. छात्रवृत्ति

जलवायु परिवर्तन छात्रवृत्ति योजना

1. मध्यप्रदेश में Ph.D करने वाले शोधार्थियों को मध्य प्रदेश पर केन्द्रित जलवायु परिवर्तन पर शोध कार्य करने के लिए राज्य शासन के अंतर्गत स्थापित पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन द्वारा 5 छात्रवृत्ति प्रदाय की जावेगी |

2. मध्यप्रदेश ऐसी छात्रवृत्ति प्रदाय करने वाला अग्रणी राज्य है |

3. मध्यप्रदेश में स्थित कुल 10 संस्थाओं / विश्वविद्यालयों भारतीय वन प्रबंधन संस्थान भोपाल, योजना एवं वास्तुकला विद्यालय भोपाल, मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान भोपाल, JNKVV जबलपुर, IIT इंदौर, IIM इंदौर, IIITM ग्वालियर द्वारा नामांकित Ph.D के पंजीकृत अभ्यर्थियों को जलवायु परिवर्तन विषय पर
शोध कार्य हेतु एप्को द्वारा छात्रवृत्ति प्रदाय की जावेगी |

4. यह छात्रवृत्ति ऐसे शोधार्थियों को दी जावेगी जो भारतीय मूल के होंगे व म.प्र. के जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में शोध के लिए संबंधित विश्वविद्यालयो / संस्थाओं / महाविद्यालयों में पंजीकृत होंगे | शोध का विषय जलवायु परिवर्तन व संबंधित विषय जैसे वानिकी, ऊर्जा, शहरी विकास, ग्रामीण विकास, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी, प्रबंधन,
मनोविज्ञान पर आधारित होना आवश्यक है |
5. सभी 10 संस्थाओं / विश्वविद्यालयों से एप्को द्वारा निर्धारित मार्गदर्शिका के अनुसार प्रस्ताव आमंत्रित किये जावेंगे | विश्वविद्यालयो / संस्थाओं / महाविद्यालयों में कार्यरत शोधार्थियों के लिए अन्य नियम व विनियम लागू होंगे | एक पारदर्शी कार्यप्रणाली के अनुसार चयनित शोधार्थियों का नाम संस्थाओं / महाविद्यालयों के
कुलपति / संचालक / प्राचार्य द्वारा एप्को को भेजे जावेंगे |
6. यह योजना UGC व CSIR की छात्रवृत्ति योजना के समतुल्य है |
7. कार्यपालन संचालक एप्को द्वारा एक ज्यूरी गठित की जावेगी जिसमे समन्वयक, राज्य जलवायु परिवर्तन ज्ञान प्रबंधन केंद्र गैर-सदस्यीय सचिव होंगे | इस ज्यूरी के समक्ष विश्वविद्यालयो / संस्थाओं / महाविद्यालयों द्वारा भेजे गए शोधार्थियों द्वारा शोध परियोजना पर एक संक्षिप्त प्रस्तुतीकरण किया जावेगा जिसके पश्चात
उपयुक्त शोधार्थियों की अनुशंसा की जावेगी |
8. प्रत्येक चयनित शोधार्थी को उनकी संस्था के माध्यम से 36 माह तक रू. 25000/- प्रति माह की राशि दी जावेगी | इसके अतिरिक्त आकस्मिक व्यय हेतु राशि रू. 50000/- प्रति वर्ष भी दी जावेगी | प्रति वर्ष कुल 5 छात्रवृत्तियाँ प्रदाय किये जाने की योजना है | प्रति शोधार्थी को 36 माह की अवधि में लगभग राशि रू. 10.50 लाख प्राप्त
होगी |