भारत में वायु गुणवत्ता सूचकांक की शुरुआत

 

देश भर में हवा की गुणवत्ता पर नजर रखने के इरादे से भारत ने वायु गुणवत्ता सूचकांक शुरू किया है। इसके साथ ही वह दुनिया के उन देशों में शामिल हो गया है, जो कोहरे की पूर्व सूचना जारी करते हैं।
इसके तहत प्रदूषण के सभी प्रमुख पैमानों पर नजर रखी जाएगी। इनमें पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 10 और पीएम 2.5), नाइट्रोजन डाय आक्साइड, सल्फर डाय आक्साइड, ओजोन, कार्बन मोनो आक्साइड, अमोनिया और लेड शामिल हैं। अगर प्रदूषण का स्तर खतरे के स्तर से ऊपर जाएगा तो यह सूचकांक लोगों को उस बारे में आगाह कर देगा।

इसके तहत वायु प्रदूषण के स्तर के बारे में लोगों को बताने के लिए एक समान रंग, संख्या और विवरण अपनाए जाएंगे। इससे आम लोग भी आसानी से प्रदूषण के स्तर को समझ सकेंगे। इस सूचकांक के तहत मुख्य रूप से छह अलग-अलग स्तर तय किए गए हैं। इन सभी के लिए अलग-अलग रंग भी तय किए गए हैं। ये छह स्तर इस तरह होंगे- अच्छा (0-50), संतोषजनक (51-100), हल्का प्रदूषण (101-200), बुरा (201-300), बेहद बुरा (301-400) और अत्यंत बुरा (401-500).

इसे देश के उन सभी शहरों में लागू किया जाएगा, जिनकी आबादी दस लाख या उससे ज्यादा है। अगले चरण में उससे कम आबादी वाले शहरों में भी इसे लागू कर दिया जाएगा।

वायु प्रदूषण सूचकांक के आधार पर सरकार लोगों को स्वास्थ्य चेतावनी भी जारी करेगा। इस लिहाज से विशेष कर बुजुर्ग और बच्चों के अलावा हृदय और सांस संबंधी समस्याओं को झेल रहे लोगों के लिए व्यवस्था की जाएगा।
सरकार ने इस सूचकांक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुरू किए गए स्वच्छ भारत अभियान का हिस्सा बताया है। साथ ही कहा है कि अब इसके तहत राज्य सरकारों के साथ मिल कर विशेष अभियान भी चलाए जाएंगे जिससे वायु की गुणवत्ता में सुधार हो सके।

इससे प्रशासन को वायु प्रदूषण के प्रभाव के बारे में जानने और उससे जूझने की रणनीति तैयार करने में भी मदद मिलेगी।

पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, ‘इससे लोगों को पता चल सकेगा कि वे जिस हवा में सांस ले रहे हैं, उसका स्तर क्या है और उसका उनके स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ने वाला है। इससे लोगों को अपने आस-पास की हवा की गुणवत्ता के सुधार के लिए जागरुक बनाने में मदद मिल सकेगी।’

विषय-वस्तु:पर्यावरण
प्रकाशित तिथि:दिसंबर 3, 2014
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